महाभारत 2.5.116
नारद उवाच · nārada uvāca
एवं यो वर्तते राजा चातुर्वर्ण्यस्य रक्षणेस विहृत्येह सुसुखी शक्रस्यैति सलोकताम्
evaṃ yo vartate rājā cāturvarṇyasya rakṣaṇesa vihṛtyeha susukhī śakrasyaiti salokatām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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