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महाभारत 2.5.2
लोकाननुचरन्सर्वानागमत्तां सभामृषिःनारदः सुमहातेजा ऋषिभिः सहितस्तदा
lokānanucaransarvānāgamattāṃ sabhāmṛṣiḥnāradaḥ sumahātejā ṛṣibhiḥ sahitastadā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंलोकाननुचरन्सर्वानागमत्तां सभामृषिःनारदः सुमहातेजा ऋषिभिः सहितस्तदा
lokānanucaransarvānāgamattāṃ sabhāmṛṣiḥnāradaḥ sumahātejā ṛṣibhiḥ sahitastadā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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