महाभारत 2.5.38
कच्चिद्बलस्य भक्तं च वेतनं च यथोचितम्संप्राप्तकालं दातव्यं ददासि न विकर्षसि
kaccidbalasya bhaktaṃ ca vetanaṃ ca yathocitamsaṃprāptakālaṃ dātavyaṃ dadāsi na vikarṣasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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