महाभारत 2.5.39
कालातिक्रमणाद्ध्येते भक्तवेतनयोर्भृताःभर्तुः कुप्यन्ति दौर्गत्यात्सोऽनर्थः सुमहान्स्मृतः
kālātikramaṇāddhyete bhaktavetanayorbhṛtāḥbhartuḥ kupyanti daurgatyātso'narthaḥ sumahānsmṛtaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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