महाभारत 2.5.45
कच्चिद्भयादुपनतं क्लीबं वा रिपुमागतम्युद्धे वा विजितं पार्थ पुत्रवत्परिरक्षसि
kaccidbhayādupanataṃ klībaṃ vā ripumāgatamyuddhe vā vijitaṃ pārtha putravatparirakṣasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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