महाभारत 2.5.56
कच्चिदभ्यवहार्याणि गात्रसंस्पर्शकानि चघ्रेयाणि च महाराज रक्षन्त्यनुमतास्तव
kaccidabhyavahāryāṇi gātrasaṃsparśakāni caghreyāṇi ca mahārāja rakṣantyanumatāstava
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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