महाभारत 2.5.62
कच्चिदायव्यये युक्ताः सर्वे गणकलेखकाःअनुतिष्ठन्ति पूर्वाह्णे नित्यमायव्ययं तव
kaccidāyavyaye yuktāḥ sarve gaṇakalekhakāḥanutiṣṭhanti pūrvāhṇe nityamāyavyayaṃ tava
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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