महाभारत 2.5.63
कच्चिदर्थेषु संप्रौढान्हितकामाननुप्रियान्नापकर्षसि कर्मभ्यः पूर्वमप्राप्य किल्बिषम्
kaccidartheṣu saṃprauḍhānhitakāmānanupriyānnāpakarṣasi karmabhyaḥ pūrvamaprāpya kilbiṣam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें