महाभारत 2.5.71
कच्चिन्नगरगुप्त्यर्थं ग्रामा नगरवत्कृताःग्रामवच्च कृता रक्षा ते च सर्वे तदर्पणाः
kaccinnagaraguptyarthaṃ grāmā nagaravatkṛtāḥgrāmavacca kṛtā rakṣā te ca sarve tadarpaṇāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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