महाभारत 2.56.2
प्रातिपीयाः शांतनवा भैमसेनाः सबाह्लिकाःदुर्योधनापराधेन कृच्छ्रं प्राप्स्यन्ति सर्वशः
prātipīyāḥ śāṃtanavā bhaimasenāḥ sabāhlikāḥduryodhanāparādhena kṛcchraṃ prāpsyanti sarvaśaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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