महाभारत 2.6.3
राजभिर्यद्यथा कार्यं पुरा तत्तन्न संशयःयथान्यायोपनीतार्थं कृतं हेतुमदर्थवत्
rājabhiryadyathā kāryaṃ purā tattanna saṃśayaḥyathānyāyopanītārthaṃ kṛtaṃ hetumadarthavat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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