महाभारत 2.6.5
एवमुक्त्वा स धर्मात्मा वाक्यं तदभिपूज्य चमुहूर्तात्प्राप्तकालं च दृष्ट्वा लोकचरं मुनिम्
evamuktvā sa dharmātmā vākyaṃ tadabhipūjya camuhūrtātprāptakālaṃ ca dṛṣṭvā lokacaraṃ munim
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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