महाभारत 2.6.7
भवान्संचरते लोकान्सदा नानाविधान्बहून्ब्रह्मणा निर्मितान्पूर्वं प्रेक्षमाणो मनोजवः
bhavānsaṃcarate lokānsadā nānāvidhānbahūnbrahmaṇā nirmitānpūrvaṃ prekṣamāṇo manojavaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें