महाभारत 2.6.8
ईदृशी भवता काचिद्दृष्टपूर्वा सभा क्वचित्इतो वा श्रेयसी ब्रह्मंस्तन्ममाचक्ष्व पृच्छतः
īdṛśī bhavatā kāciddṛṣṭapūrvā sabhā kvacitito vā śreyasī brahmaṃstanmamācakṣva pṛcchataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें