महाभारत 2.6.9
तच्छ्रुत्वा नारदस्तस्य धर्मराजस्य भाषितम्पाण्डवं प्रत्युवाचेदं स्मयन्मधुरया गिरा
tacchrutvā nāradastasya dharmarājasya bhāṣitampāṇḍavaṃ pratyuvācedaṃ smayanmadhurayā girā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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