महाभारत 2.65.3
इदं त्वेवावबोद्धव्यं वृद्धस्य मम शासनम्धिया निगदितं कृत्स्नं पथ्यं निःश्रेयसं परम्
idaṃ tvevāvaboddhavyaṃ vṛddhasya mama śāsanamdhiyā nigaditaṃ kṛtsnaṃ pathyaṃ niḥśreyasaṃ param
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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