महाभारत 2.65.7
संवादे परुषाण्याहुर्युधिष्ठिर नराधमाःप्रत्याहुर्मध्यमास्त्वेतानुक्ताः परुषमुत्तरम्
saṃvāde paruṣāṇyāhuryudhiṣṭhira narādhamāḥpratyāhurmadhyamāstvetānuktāḥ paruṣamuttaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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