महाभारत 2.68.4
अद्य देवाः संप्रयाताः समैर्वर्त्मभिरस्थलैःगुणज्येष्ठास्तथा ज्येष्ठा भूयांसो यद्वयं परैः
adya devāḥ saṃprayātāḥ samairvartmabhirasthalaiḥguṇajyeṣṭhāstathā jyeṣṭhā bhūyāṃso yadvayaṃ paraiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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