महाभारत 2.7.24
स्रग्विणो भूषिताश्चान्ये यान्ति चायान्ति चापरेबृहस्पतिश्च शुक्रश्च तस्यामाययतुः सह
sragviṇo bhūṣitāścānye yānti cāyānti cāparebṛhaspatiśca śukraśca tasyāmāyayatuḥ saha
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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