महाभारत 2.70.13
कथं सद्धर्मचारित्रवृत्तस्थितिविभूषितान्अक्षुद्रान्दृढभक्तांश्च दैवतेज्यापरान्सदा
kathaṃ saddharmacāritravṛttasthitivibhūṣitānakṣudrāndṛḍhabhaktāṃśca daivatejyāparānsadā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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