महाभारत 2.70.8
सहदेवश्च मे पुत्रः सदावेक्ष्यो वने वसन्यथेदं व्यसनं प्राप्य नास्य सीदेन्महन्मनः
sahadevaśca me putraḥ sadāvekṣyo vane vasanyathedaṃ vyasanaṃ prāpya nāsya sīdenmahanmanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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