महाभारत 2.8.28
कालचक्रं च साक्षाच्च भगवान्हव्यवाहनःनरा दुष्कृतकर्माणो दक्षिणायनमृत्यवः
kālacakraṃ ca sākṣācca bhagavānhavyavāhanaḥnarā duṣkṛtakarmāṇo dakṣiṇāyanamṛtyavaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें