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महाभारत 2.8.34
चित्राङ्गदाश्चित्रमाल्याः सर्वे ज्वलितकुण्डलाःसुकृतैः कर्मभिः पुण्यैः परिबर्हैर्विभूषिताः
citrāṅgadāścitramālyāḥ sarve jvalitakuṇḍalāḥsukṛtaiḥ karmabhiḥ puṇyaiḥ paribarhairvibhūṣitāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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