महाभारत 2.9.4
तथा शकुनयस्तस्यां नानारूपा मृदुस्वराःअनिर्देश्या वपुष्मन्तः शतशोऽथ सहस्रशः
tathā śakunayastasyāṃ nānārūpā mṛdusvarāḥanirdeśyā vapuṣmantaḥ śataśo'tha sahasraśaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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