महाभारत 2.9.5सा सभा सुखसंस्पर्शा न शीता न च घर्मदावेश्मासनवती रम्या सिता वरुणपालिताsā sabhā sukhasaṃsparśā na śītā na ca gharmadāveśmāsanavatī ramyā sitā varuṇapālitāइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें