महाभारत 2.9.6यस्यामास्ते स वरुणो वारुण्या सह भारतदिव्यरत्नाम्बरधरो भूषणैरुपशोभितःyasyāmāste sa varuṇo vāruṇyā saha bhāratadivyaratnāmbaradharo bhūṣaṇairupaśobhitaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें