महाभारत 3.121.19
संधिरेष नरश्रेष्ठ त्रेताया द्वापरस्य चएतमासाद्य कौन्तेय सर्वपापैः प्रमुच्यते
saṃdhireṣa naraśreṣṭha tretāyā dvāparasya caetamāsādya kaunteya sarvapāpaiḥ pramucyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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