महाभारत 3.121.3आमूर्तरयसश्चेह राजा वज्रधरं प्रभुम्तर्पयामास सोमेन हयमेधेषु सप्तसुāmūrtarayasaśceha rājā vajradharaṃ prabhumtarpayāmāsa somena hayamedheṣu saptasuइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें