महाभारत 3.123.16
ततोऽम्भश्च्यवनः शीघ्रं रूपार्थी प्रविवेश हअश्विनावपि तद्राजन्सरः प्रविशतां प्रभो
tato'mbhaścyavanaḥ śīghraṃ rūpārthī praviveśa haaśvināvapi tadrājansaraḥ praviśatāṃ prabho
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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