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महाभारत 3.123.19
सा समीक्ष्य तु तान्सर्वांस्तुल्यरूपधरान्स्थितान्निश्चित्य मनसा बुद्ध्या देवी वव्रे स्वकं पतिम्
sā samīkṣya tu tānsarvāṃstulyarūpadharānsthitānniścitya manasā buddhyā devī vavre svakaṃ patim
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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