महाभारत 3.126.17
कस्य कर्मेदमिति च पर्यपृच्छन्समागताःयुवनाश्वो मयेत्येव सत्यं समभिपद्यत
kasya karmedamiti ca paryapṛcchansamāgatāḥyuvanāśvo mayetyeva satyaṃ samabhipadyata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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