महाभारत 3.126.27
ततः शक्रो महातेजास्तं दिदृक्षुरुपागमत्प्रदेशिनीं ततोऽस्यास्ये शक्रः समभिसंदधे
tataḥ śakro mahātejāstaṃ didṛkṣurupāgamatpradeśinīṃ tato'syāsye śakraḥ samabhisaṃdadhe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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