महाभारत 3.126.36एकाह्ना पृथिवी तेन धर्मनित्येन धीमतानिर्जिता शासनादेव सरत्नाकरपत्तनाekāhnā pṛthivī tena dharmanityena dhīmatānirjitā śāsanādeva saratnākarapattanāइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें