महाभारत 3.129.2अम्बरीषश्च नाभाग इष्टवान्यमुनामनुयज्ञैश्च तपसा चैव परां सिद्धिमवाप सःambarīṣaśca nābhāga iṣṭavānyamunāmanuyajñaiśca tapasā caiva parāṃ siddhimavāpa saḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें