महाभारत 3.129.3
देशो नाहुषयज्ञानामयं पुण्यतमो नृपयत्रेष्ट्वा दश पद्मानि सदस्येभ्यो निसृष्टवान्
deśo nāhuṣayajñānāmayaṃ puṇyatamo nṛpayatreṣṭvā daśa padmāni sadasyebhyo nisṛṣṭavān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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