Loading
महाभारत 3.14.17
अहो कृच्छ्रमनुप्राप्ताः सर्वे स्म भरतर्षभये वयं त्वां व्यसनिनं पश्यामः सह सोदरैः
aho kṛcchramanuprāptāḥ sarve sma bharatarṣabhaye vayaṃ tvāṃ vyasaninaṃ paśyāmaḥ saha sodaraiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें