महाभारत 3.151.2
कुबेरभवनाभ्याशे जातां पर्वतनिर्झरेसुरम्यां विपुलच्छायां नानाद्रुमलतावृताम्
kuberabhavanābhyāśe jātāṃ parvatanirjharesuramyāṃ vipulacchāyāṃ nānādrumalatāvṛtām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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