महाभारत 3.151.3
हरिताम्बुजसंछन्नां दिव्यां कनकपुष्कराम्पवित्रभूतां लोकस्य शुभामद्भुतदर्शनाम्
haritāmbujasaṃchannāṃ divyāṃ kanakapuṣkarāmpavitrabhūtāṃ lokasya śubhāmadbhutadarśanām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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