महाभारत 3.151.5
तां तु पुष्करिणीं रम्यां पद्मसौगन्धिकायुताम्जातरूपमयैः पद्मैश्छन्नां परमगन्धिभिः
tāṃ tu puṣkariṇīṃ ramyāṃ padmasaugandhikāyutāmjātarūpamayaiḥ padmaiśchannāṃ paramagandhibhiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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