महाभारत 3.151.7
आक्रीडं यक्षराजस्य कुबेरस्य महात्मनःगन्धर्वैरप्सरोभिश्च देवैश्च परमार्चिताम्
ākrīḍaṃ yakṣarājasya kuberasya mahātmanaḥgandharvairapsarobhiśca devaiśca paramārcitām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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