महाभारत 3.165.22
प्रदीयमानं देवैस्तु देवदत्तं जलोद्भवम्प्रत्यगृह्णं जयायैनं स्तूयमानस्तदामरैः
pradīyamānaṃ devaistu devadattaṃ jalodbhavampratyagṛhṇaṃ jayāyainaṃ stūyamānastadāmaraiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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