महाभारत 3.166.11
ततः शङ्खमुपादाय देवदत्तं महास्वनम्पुरमासुरमाश्लिष्य प्राधमं तं शनैरहम्
tataḥ śaṅkhamupādāya devadattaṃ mahāsvanampuramāsuramāśliṣya prādhamaṃ taṃ śanairaham
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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