महाभारत 3.166.22
ततो देवर्षयश्चैव दानवर्षिगणाश्च येब्रह्मर्षयश्च सिद्धाश्च समाजग्मुर्महामृधे
tato devarṣayaścaiva dānavarṣigaṇāśca yebrahmarṣayaśca siddhāśca samājagmurmahāmṛdhe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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