महाभारत 3.171.3
भीष्मो द्रोणः कृपः कर्णः शकुनिः सह राजभिःसंग्रामस्थस्य ते पुत्र कलां नार्हन्ति षोडशीम्
bhīṣmo droṇaḥ kṛpaḥ karṇaḥ śakuniḥ saha rājabhiḥsaṃgrāmasthasya te putra kalāṃ nārhanti ṣoḍaśīm
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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