महाभारत 3.179.9तथा बहुविधाकारा प्रावृण्मेघानुनादिताअभ्यतीता शिवा तेषां चरतां मरुधन्वसुtathā bahuvidhākārā prāvṛṇmeghānunāditāabhyatītā śivā teṣāṃ caratāṃ marudhanvasuइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें