महाभारत 3.18.19
हाहाकृतमभूत्सैन्यं शाल्वस्य पृथिवीपतेनष्टसंज्ञे निपतिते तदा सौभपतौ नृप
hāhākṛtamabhūtsainyaṃ śālvasya pṛthivīpatenaṣṭasaṃjñe nipatite tadā saubhapatau nṛpa
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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