महाभारत 3.18.20
तत उत्थाय कौरव्य प्रतिलभ्य च चेतनाम्मुमोच बाणं तरसा प्रद्युम्नाय महाबलः
tata utthāya kauravya pratilabhya ca cetanāmmumoca bāṇaṃ tarasā pradyumnāya mahābalaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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