महाभारत 3.198.58
कामक्रोधौ वशे कृत्वा दम्भं लोभमनार्जवम्धर्म इत्येव संतुष्टास्ते शिष्टाः शिष्टसंमताः
kāmakrodhau vaśe kṛtvā dambhaṃ lobhamanārjavamdharma ityeva saṃtuṣṭāste śiṣṭāḥ śiṣṭasaṃmatāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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