महाभारत 3.201.4
ततो रागः प्रभवति द्वेषश्च तदनन्तरम्ततो लोभः प्रभवति मोहश्च तदनन्तरम्
tato rāgaḥ prabhavati dveṣaśca tadanantaramtato lobhaḥ prabhavati mohaśca tadanantaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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