महाभारत 3.201.7
सुहृद्भिर्वार्यमाणश्च पण्डितैश्च द्विजोत्तमउत्तरं श्रुतिसंबद्धं ब्रवीति श्रुतियोजितम्
suhṛdbhirvāryamāṇaśca paṇḍitaiśca dvijottamauttaraṃ śrutisaṃbaddhaṃ bravīti śrutiyojitam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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